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वो समय जब निजी स्वार्थ के लिए हुई थी लोकतंत्र की हत्या !

देश के आपातकाल के दौर को लेकर हर किसी की अपनी राय हो सकती है, आपातकाल क्यों लगा संभवतः इसके बारे में हर किसी को बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। कई बार सियासी फलकों में ये सवाल गूंजते हैं कि क्या इमरजेंसी इंदिरा गांधी ने व्यक्तिगत असंतोष के कारण लगाई थी ? ये सवाल गूंजने भी चाहिए क्योंकि लोकतंत्र में अगर सवाल न पूछे जाएं तो ये भी एक आपातकाल का ही दौर हो सकता है। कैसे लिखी गई आपातकाल की पटकथा ? दरअसल आपातकाल की सारी कहानी की शुरू हुई साल 1971 में जब इंदिरा गांधी ने अपनी पैतृक सीट रायबरेली से अपने प्रतिद्वंदी राजनारायण सिंह को बड़ी आसानी से हरा दिया, और कांग्रेस देश की सत्ता में एक बार फिर काबिज़ हुई इसके चार साल बाद अचानक राजनारायण सिंह को याद आया कि वे गलत तरीके से हारे हैं और उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। राजनारायण सिंह की दलील थी कि इंदिरा गांधी गलत तरीके से चुनाव जीती इसके अलावा उन्होंने तय बजट से ज्यादा देश का पैसा खर्च किया है और वोटर्स को पैसे के दम पर खरीदा है।  अब क्योंकि ये आरोप था तत्कालीन प्रधानमंत्री पर इसलिए बवाल होना लाजमी था। इलाहाबाद हाईकोर्...

तिलाड़ी कांड के 90 बरस

तिलाड़ी कांड (उत्तराखंड का जलियवाला कांड) को हुए 90 बरस पूरे उत्तराखंड! जो अपने आप में कई सांस्कृतिक परंपराओं को समेटे हुए है, जिसकी सुंदरता पर्यटकों का मन मोह लेती है, जहाँ हज़ारों तीर्थ स्थल मौजूद हैं। और उस उत्तराखंड का एक खूबसूरत जिला है " टिहरी"  जो अपने अंंदर कई राज समेटे  बैठा है , उनमें से ही एक राज है   तिलाड़ी कांड तिलाड़ी कांड के विषय में शायद ही  बहुत ज्यादा लोग जानते हों  और इसमे गलती उनकी भी नहीं है क्योंकि ये कांड कभी ज्यादा चर्चा में आया ही नहीं !  ये बात है 30मई सन् 1930 की जब  टिहरी जिले में स्थित एक छोटे से गाँव " तिलाड़ी " के एक मैैदान में सैकडों लोग अपने  अधिकारों के लिए, अपने हक की लडाई लड़ने के लिए जमा हुए।  कहा जाता है की टिहरी के तत्कालीन  राजा " नरेंद्र शाह " आम लोगों पर जुल्म करते थे और उनके अधिकारों की हर समय हत्या करते थे   जिससे वे लोग बहुुुुत परेशान थे। इसी का विरोध करने के लिए वे लोग सामू हिक रूप से वहाँ इकट्ठा हुए थे। लेकिन उन मासूमों को शायद पता नहीं था की वो उनका आखिरी दिन साबित हो जायेगा...